33.7 C
Mumbai
Monday, September 21, 2020

4G डाउनलोड स्पीड के मामले में जियो की बादशाहत बरकरार, एयरटेल और वोडाफोन से ढाई गुना तेज

दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो ने 4जी स्पीड के मामले में अन्य दूरसंचार कंपनियों को पछाड़ते हुये अपनी बादशाहत को लगातार बरकरार रखा...
More

    Latest Posts

    बिहार में सरकारी नौकरी, फिशरीज का कोर्स करने वाले सीधी बहाली के जरिये बनेंगे अधिकारी

    बिहार में इंडस्ट्रियल फिश एंड फिशरीज की पढ़ाई करने वाले छात्रों को सीधे अफसर (मत्स्य विकास पदाधिकारी) बनने का मौका मिलेगा। इससे न...

    PM किसान सम्मान निधि योजना में 110 करोड़ का घोटाला, 18 लोगों को किया गया अरेस्ट

    केंद्र सरकार के किसान सम्मान निधि योजना में एक बड़ा घोटाल सामने आया है. सरकार के इस स्कीम का लाभ कुछ ऐसे...

    खो गया है आपका पैन कार्ड? अब दोबारा कैसे पाएंगे और कितनी जेब ढीली करनी होगी, जानिए

    अक्सर PAN Card खो जाने पर लोग परेशान हो जाते हैं. आइए जानते हैं दोबारा पैन कार्ड प्राप्त करने के लिए क्या...

    बिहार चुनाव 2020: नीतीश कुमार के लिए युवा वोटर क्यों हैं बड़ी चुनौती

    बिहार के चुनावी मैदान में खलबली है. चुनावी महाबली अपने शुरूआती दांव आजमाने लगे हैं. एक दूसरे की ताकत को भांपा और...

    IPS Success Story: एक छोटे से कस्बे से ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और फिर IPS ऑफिसर, प्रेरणादायक है इल्मा अफरोज़ का सफर

    उत्तर प्रदेश के मुराबाद के एक छोटे से कस्बे की इल्मा ने खेतों में काम करने से लेकर जरूरत पड़ने पर लोगों के घर में बर्तन मांजने तक का काम किया पर कभी हिम्मत नहीं हारी और देश सेवा के लिए आईपीएस ऑफिसर बनी.

    Success Story Of IPS Ilma Afroz: यूपी, मुरादाबाद के कस्बे कुंदरकी का नाम शायद कोई जानता भी नहीं था, तब तक, जब तक वहां की बेटी इल्मा अफरोज़ ने अपने गांव का नाम रोशन नहीं कर दिया. अचानक से लोग जानने लगे कि कुंदरकी भी कोई जगह है क्योंकि आईपीएस ऑफिसर बनकर देश की सेवा का सपना देखने वाली इल्मा वहीं से हैं. इल्मा की कहानी जबरदस्त है. अगर उनका इतिहास उठाकर देखें तो पता चलेगा कि इनकी बुनियादी शिक्षा-दीक्षा देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता कि यह लड़की दिल्ली के स्टीफेन्स कॉलेज से लेकर, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और न्यूयॉर्क तक जा सकती है. पर कहते हैं न कि सपने सच्चे हों तो दुनिया की कोई ताकत उन्हें पूरा होने से नहीं रोक सकती. इल्मा के साथ भी ऐसा ही हुआ. लेकिन जब पूरे जीवन के संघर्ष के बाद इल्मा को विदेश में सेटल होकर एक आरामदायक जिंदगी जीने का मौका मिला तो इल्मा ने अपने वतन, अपनी मिट्टी और अपनी मां को चुना.

    पिता के निधन ने बदली कहानी –

    इल्मा और उनके खुशहाल परिवार को नज़र तब लगी जब उनके पिता का असमय देहांत हो गया. उस समय इल्मा 14 वर्ष की थी और उनका भाई उनसे दो साल छोटा. घर के अर्निंग मेंबर के न रहने से अचानक मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा. इल्मा की अम्मी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें. लोगों ने सलाह दी कि लड़की को पढ़ाने में पैसे बर्बाद न करके इसकी शादी कर दें, बोझ कम हो जाएगा. इल्मा की अम्मी ने कभी किसी को जवाब नहीं दिया पर करी हमेशा अपने मन की. इल्मा कक्षा एक से हमेशा अव्वल आती थी. ऐसे में उनका पढ़ाई के प्रति रुझान मां से छिपा नहीं था. उनकी मां ने दहेज के लिए पैसा इकट्ठा करने की जगह उस पैसे से बेटी को पढ़ाया. इल्मा भी पारिवारिक हालात से बहुत अच्छी तरह वाकिफ थी इसलिए उन्होंने बहुत पहले से अपनी मेहनत के दम पर स्कॉलरशिप्स पाना शुरू कर दिया था. इल्मा की पूरी हायर स्टडीज़ स्कॉलरशिप्स के माध्यम से ही हुयी हैं.

    कुंदरकी से पहुंची सेंट स्टीफेन्स, दिल्ली –

    इल्मा अपने सेंट स्टीफेन्स में बिताए सालों को जीवन का श्रेष्ठ समय मानती हैं, जहां उन्होंने बहुत कुछ सीखा. हालांकि बेटी को दिल्ली भेजने के कारण उनकी मां ने खूब खरी-खोटी सुनी कि बेटी हाथ से निकल जायेगी, उसको पढ़ाकर क्या करना है वगैरह-वगैरह पर उन्हें अपनी बच्ची पर पूरा विश्वास था. उन्होंने किसी की नहीं सुनी. सेंट स्टीफेन्स के बाद इल्मा को मास्टर्स के लिये ऑक्सफोर्ड जाने